पाठ्यक्रम: GS3/कृषि
संदर्भ
- केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 31 मार्च, 2027 की निर्धारित समय-सीमा से पाँच माह पूर्व ही किसानों के लिए 11 करोड़ विशिष्ट डिजिटल पहचान-पत्र तैयार कर लिए हैं।
- यह उपलब्धि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित डिजिटल कृषि मिशन के अंतर्गत हासिल की गई है।
किसान पहचान-पत्र
- यह आधार-आधारित किसानों की एक विशिष्ट डिजिटल पहचान है, जिसे राज्य की भूमि अभिलेख प्रणाली से गतिशील रूप से जोड़ा जाता है।
- किसी किसान के भूमि अभिलेखों के विवरण में परिवर्तन होने पर किसान पहचान-पत्र स्वतः अद्यतन हो जाता है।
- किसान पहचान-पत्रों के माध्यम से तैयार किए गए डेटाबेस को किसान रजिस्ट्री कहा जाता है।
- यह केंद्र सरकार के डिजिटल कृषि मिशन के एग्री-स्टैक घटक के अंतर्गत तीन प्रमुख रजिस्ट्रियों में से एक है।
- किसान पहचान-पत्र का उद्देश्य किसानों को निम्नलिखित लाभ प्रदान करना है:
- सरकारी योजनाओं तक सरल एवं निर्बाध पहुँच।
- कागजरहित एवं संपर्करहित फसल ऋण तथा अन्य ऋण सुविधाओं की सुव्यवस्थित उपलब्धता, जिनकी प्रक्रिया एक घंटे के अंदर पूरी की जा सकती है।
- किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यक्तिगत कृषि विस्तार सेवाएँ।
डिजिटल कृषि मिशन
- इस मिशन को वर्ष 2024 में ₹2,817 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ स्वीकृति प्रदान की गई थी, जिसमें केंद्र का हिस्सा ₹1,940 करोड़ है।
- इसे डिजिटल कृषि संबंधी पहलों को समर्थन देने वाली एक व्यापक योजना के रूप में परिकल्पित किया गया है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित पहलें शामिल हैं:
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का निर्माण।
- डिजिटल सामान्य फसल आकलन सर्वेक्षण (DGCES) का कार्यान्वयन।
- केंद्र सरकार, राज्य सरकारों तथा शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों द्वारा अन्य सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी पहलों को आगे बढ़ाना।
- राज्यों को उनके द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों के आधार पर धनराशि जारी की जाती है।
- इस मिशन का उद्देश्य एक सुदृढ़ डिजिटल कृषि पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है, जो किसान-केंद्रित नवाचारी डिजिटल समाधानों को बढ़ावा दे तथा देश के सभी किसानों को फसलों से संबंधित समयबद्ध एवं विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराए।
कृषि के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना
- कृषि के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का उद्देश्य किसानों से संबंधित व्यापक एवं उपयोगी आँकड़े उपलब्ध कराना है। इनमें प्रमाणित जनसांख्यिकीय विवरण, भूमि जोत तथा बोई गई फसलों की जानकारी शामिल है।
- इसमें राज्य सरकार की नीति के अनुसार वास्तविक खेती करने वाले कृषक तथा पट्टेदार किसान भी शामिल होते हैं।
- यह डिजिटल शासन की दिशा में एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण है, जो निम्नलिखित सिद्धांतों पर आधारित है:
- अंतर-संचालनीयता : केंद्र एवं राज्य सरकार के डिजिटल मंचों के साथ निर्बाध एकीकरण सुनिश्चित करना।
- खुले मानक: व्यापक अंगीकरण एवं सुलभता सुनिश्चित करना।
- विस्तार-क्षमता : देशभर के किसानों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रणाली का विकास करना।
- सुदृढ़ शासन : आँकड़ों की सुरक्षा एवं गोपनीयता संबंधी ढाँचे के माध्यम से विश्वास और पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के तीन स्तंभ
- एग्री-स्टैक : यह किसानों के लिए एक डिजिटल साधन-संग्रह है। इसकी संरचना संघीय प्रकृति की है, जिसका निर्माण केंद्र एवं राज्य सरकारों की विभिन्न एजेंसियों द्वारा सहयोगात्मक रूप से किया जाता है।
- एग्री-स्टैक में तीन आधारभूत रजिस्ट्रियाँ शामिल हैं:
- किसान रजिस्ट्री : किसानों की एक डिजिटल निर्देशिका।
- भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र : प्रत्येक गाँव के मानचित्र, जिनमें फसलों से संबंधित विवरण भी शामिल होते हैं।
- बोई गई फसलों की रजिस्ट्री : किस क्षेत्र में कौन-सी फसल बोई गई है, इसका डिजिटल अभिलेख।
- एग्री-स्टैक में तीन आधारभूत रजिस्ट्रियाँ शामिल हैं:
- कृषि निर्णय सहायता प्रणाली : यह किसानों को समयबद्ध एवं विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराती है, जिससे वे सूचित निर्णय ले सकें।
- इसका उद्देश्य एक व्यापक भू-स्थानिक प्रणाली विकसित करना है, जो फसलों, मृदा, मौसम, जल संसाधनों आदि से संबंधित सुदूर संवेदन-आधारित सूचनाओं को एकीकृत करे।
- मृदा प्रोफाइल मानचित्रण : इसके अंतर्गत मिट्टी के गुणों, आर्द्रता के स्तर तथा पोषक तत्त्वों की मात्रा का मानचित्रण किया जाता है, जिससे परिशुद्ध कृषि को बढ़ावा मिलता है।
चुनौतियाँ
- डिजिटल विभाजन : दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले किसानों को सीमित इंटरनेट सुविधा तथा डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
- आँकड़ों की गोपनीयता : किसानों के संवेदनशील आँकड़ों की सुरक्षा के लिए सुदृढ़ सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
- अंतरराज्यीय समन्वय : सभी राज्यों में एकसमान कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए सहयोग तथा संसाधनों के साझा उपयोग की व्यवस्था आवश्यक है।
आगे की राह
- ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल अवसंरचना को सुदृढ़ किया जाना चाहिए।
- किसानों के बीच डिजिटल साक्षरता बढ़ाने के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए।
- आँकड़ों की सुरक्षा एवं गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए सुदृढ़ शासन ढाँचे लागू किए जाने चाहिए।
- उन्नत प्रौद्योगिकियों तथा किसान-केंद्रित दृष्टिकोणों का उपयोग करके डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना कृषि उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय में सुधार करने तथा खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
स्रोत: TH
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